Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
शैशवे गुरुतो भीतिर्मातृतः पितृतस्तथा ।
जनतो ज्येष्ठबालाच्च शैशवं भयमन्दिरम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
बाल्यावस्था में गुरुओं से, माता-पिता से, अन्यान्य जनों से
एवं अपने से बड़े बालक से भय बना रहता है, इसलिए बाल्यावस्था को यदि भय का घर कहा जाय, तो
कोई अत्युक्ति न होगी