Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
उड्डीतुमभिवाञ्छन्ति पक्षाभ्यां क्षुत्परायणाः ।
भयाहारपरा नित्यं बाला विहगधर्मिणः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
बालक
सचमुच पक्षियों के सदृश हैं, जैसे भूखे पक्षी आकाश में बहुत ऊँचा उड़ने की इच्छा करते हैं, वैसे ही
भूखे बालक भी आहार लेने के लिए हाथों के सहारे उठने की इच्छा करते हैं, पर सामर्थ्य न होने से उठ
नहीं सकते । जैसे पक्षियों को दूसरे से भय और आहार की चिन्ता प्रधानरूप से रहती है, वैसे बालक भी
भय और भोजन में तत्पर रहते हैं