Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
संहृष्टो भुवनं भोक्तमिन्दुमादातुमम्बरात् ।
वाञ्छते येन मौर्ख्येण तत्सुखाय कथं भवेत् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी समय जब बालक भूख लगने से
रोता है, तब तुम्हें खाने के लिए भुवन (लोक) दूँगी, यों माता या पिता के कहनेपर सन्तुष्ट होकर वह
भुवन को ही खाने की इच्छा करता है । तुम्हें चन्द्रमारूप खिलौना देंगे, यों ठगनेपर आकाश से चन्द्रमा
को हाथ में लेने की इच्छा करता है, ऐसी मूर्खता से पूर्ण बाल्यावस्था कैसे सुखकर हो सकती है ?