Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 61
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
तडित्सु शरदभ्रेषु गन्धर्वनगरेषु च ।
स्थैर्यं येन विनिर्णीतं स विश्वसितु विग्रहे ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस पुरुष ने बिजली में, शरत् ऋतु के
मेघो में और गन्धर्वनगर में ये चिरस्थायी हैं, ऐसा निर्णय कर रक्खा हे, वह इस क्षणभंगुर शरीर को भले
ही चिरस्थायी माने