Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
देहालयं धारयितुं न शक्नोमि मुनीश्वर ।
पङ्कमग्नं समुद्धर्तुं गजमल्पबलो यथा ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनीश्वर, जैसे कोई निर्बल जीव कीचड़ में फँसे हुए हाथी को नहीं निकाल सकता, वैसे ही मैं भी
इस देहरूपी गृह को धारण करने में असमर्थ हूँ