Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

प्रसृतस्नायुतन्त्रीकं रक्ताम्बुकृतकर्दमम् । जरामङ्कोलधवलं नेष्टं देहगृहं मम ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

स्नायु (नस) रूपी रस्सियाँ जिसमें चारों ओर तनी हैं, रस, रक्तरूप जल से रचित गारे से लिपा गया, वृद्धावस्था (केश रोम आदि को सफेद करनेवाला बुढापा) रूपी चूने से सफेद यह देहरूपी घर मुझे अभीष्ट नहीं हे