Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 17, Verse 42

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 17, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 42

संस्कृत श्लोक

तावन्मुह्यत्ययं मूको लोको विलुलिताशयः । यावदेवानुसंधत्ते तृष्णा विषविषूचिका ॥ ४२ ॥

हिन्दी अर्थ

वेदान्त आदि अध्यात्मशास्त्रो के विचार से शून्य अतएव व्याकुलचित्त के संसारी लोग तभी तक मोह को प्राप्त होते हैं जब तक विषप्रयुक्त विसूचिका रोग के समान मृत्यु की हेतु तृष्णा पीछा करती रहती है अर्थात्‌ लोग उसका त्याग नहीं करते