Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 16, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 16, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अप्यब्धिपानान्महतः सुमेरून्मूलनादपि ।
अपि वह्न्यशनात्साधो विषमश्चित्तनिग्रहः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे साधो, समुद्र को पीने, सुमेरू पर्वत को लाँघने और
अग्निभक्षण से भी चित्त को अपने वश में करना कठिन है अर्थात् समुद्रपान आदि महान कार्य हैं, पर
उनके होने की सम्भावना हो सकती है, परन्तु मनका निग्रह करना उससे भी कठिन है