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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 16, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 16, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

पातालाद्गच्छता पृथ्वीं पृथ्व्याः पातालगामिना । कूपकाष्ठं कुदाम्नेव वेष्टितोऽस्मि कुचेतसा ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

पृथिवी से (उर्ध्व प्रदेश से) पाताल को (अधः प्रदेश को) और पाताल से (अधः प्रदेश से) पृथिवी को (उर्ध्व प्रदेश को ) जा रही रस्सी से लपेटे हुए घटीयन्त्र (रस्सी से जल आदि भार को खींचने के लिए एक ओर जिसमें रस्सी वधी रहती है, दूसरी ओर पत्थर आदि भारी वस्तु बँधी रहती है, जिसे अरहट कहते हैं, कुएँ से जल निकालने का यन्त्र) के समान मैं इस कुत्सित चित्तरूप रस्सी से वेष्टित होकर कभी ऊपर जाता हूँ कभी नीचे गिरता हूँ