Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 15, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 15, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

अहंकारवशाद्यद्यन्मया भुक्तं हुतं कृतम् । सर्वं तत्तदवस्त्वेव वस्त्वहंकाररिक्तता ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

“निन्द्रेष्यपि गुणो ग्रह्म: इस न्याय से बुद्ध का उदाहरण दिया है या जितः“ ऐसा पाठ समझना चाहिए । अहंकार के वशीभूत होकर मैंने जो कुछ खाया-पिया, यज्ञ-याग आदि किया तथा इसके अतिरिक्त और जो कुछ कर्म किया, वह सब तुच्छ (असार) है, अहंकार से रहित होना ही सार वस्तु है