Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 15, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 15, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
पुत्रमित्रकलत्रादितन्त्रमन्त्रविवर्जितम् ।
प्रसारितमनेनेह मुनेऽहंकारवैरिणा ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
महामुने, इस अहंकाररूपी परम शत्रु ने ही इस संसार में मन्त्र-तन्त्र से शून्य पुत्र, मित्र,
कलत्र आदि वशीकरण, उन्मादन आदि के उपाय फैला रक्खे हें