Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 12, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 12, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
चिन्तानिचयचक्राणि नानन्दाय धनानि मे ।
संप्रसूतकलत्राणि गृहाण्युग्रापदामिव ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
धनियों को चिन्तारूप धार से खण्डशः
काटने के लिए प्रवृत्त चक्ररूपी ये विविध धन मुझे आनन्द नहीं देते और स्त्री, पुत्रादि परिवार से परिपूर्ण
घर उग्र आपत्तियों के घरों के समान मुझे आनन्द नहीं दे रहे हैं