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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 12, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 12, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । भगवन्भवता पृष्टो यथावदधुनाऽखिलम् । कथयाम्यहमज्ञोऽपि को लङ्घयति सद्वचः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

रामजी ने कहा : भगवन्‌ यद्यपि मैं अज्ञानी हूँ, तथापि इस समय आपके पूछने पर सब कुछ कहूँगा, क्योंकि सतपुरुषों के वचनों का कौन उल्लंघन कर सकता है ?