Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
किंनिष्ठाः के च ते केन कियन्तः कारणेन ते ।
आधयः प्रविलुम्पन्ति मनो गेहमिवाखवः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे घर को चूहे खोद
डालते हैं, वैसे ही जो मन की व्यथाएँ आपके चित्तको दुःखी कर रही हैं। वे किसलिए हुई हैं, कितनी हैं,
और कौनसी अभिलाषा के प्राप्त होने पर शान्त होगी 2