Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 10, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 10, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
दशमः सर्गः वाल्मीकिरुवाच ।
तथा वसिष्ठे ब्रुवति राजा दशरथः सुतम् ।
संप्रहृष्टमना राममाजुहाव सलक्ष्मणम् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
दसवाँ सर्ग
श्रीवसिष्ठजी के समझाने पर राजा दशरथ द्वारा श्रीरामचन्द्रजी को अन्तःपुर से बुलवाने के लिए
प्रतिहार को भेजना, श्रीरामचन्द्रजी को उदास देखकर प्रतिहार का वापस आना, रामचन्द्रजी की
अवस्था पूछने पर अनुचर का श्रीरामचन्द्रजी की विरागावस्था कहना |
वाल्मीकिजी ने कहा : हे भरद्वाज, महर्षि वसिष्ठजी के यों कहने पर राजा दशरथ ने प्रसन्नमन
होकर अपने पुत्र श्रीरामचन्द्रजी को लक्ष्मण के साथ बुलाने के लिए प्रतीहार से कहा