Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
नैवात्मता न परता न जगत्ता न शून्यता ।
न मौनता न मौनित्वं किंचिन्नेहोपपद्यते ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
सत् विद् आनन्दरूप उसके आत्मत्व आदि भेद भी नहीं हैं; क्योकि कोई व्यावर्त्य नहीं है फिर
ओर भेद क्यों कर होगे, यह कहते हैं ।
न तो आत्मता है, न परता है, न जगत्ता है, न मौनता है, न मौनिता है बहुत क्या कहें उस
सद्रूप में कुछ भी उत्पन्न नहीं है