Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
ऋते पदार्थभूतार्थभविष्यद्वस्तुबोधतः ।
शेषं बभ्र्वहिगोमायुगजादीनां नृभिः समम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
शास्त्रवेद्य पुण्य, पाप,
ब्रह्मतत्त्व आदि तथा अतीत और भावी पदार्थो के सिवा शेष ज्ञान नेवला, साँप, सियार, हाथी आदि
को शास्त्रगम्य धर्म, अधर्म, आत्मतत्त्व, अतीत, अनागत आदि पदार्थों का ज्ञान नहीं होता, मनुष्य
को हो सकता है, इसके अतिरिक्त ज्ञान जैसा मनुष्य को है वैसा ही नेवला आदि को भी है