Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 98, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 98, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 98 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
देशकालवशात्पापैर्महोत्पातोऽपि दृश्यते ।
सर्वकर्माणि संत्यज्य कुर्यात्सज्जनसंगमम् ।
एतत्कर्म निराबाधं लोकद्वितयसाधनम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
कथित का अनुवाद कर उपसंहार करते हैं /
सब कार्यों को छोड़कर सज्जनो का ही समागम करना चाहिए, यही कर्म निराबाधरूप से
इहलोक एवं परलोक दोनों का साधन हे यानी दोनों लोकों की प्राप्ति कराता है