Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अनारतविपर्यासदर्शनात्क्षणभङ्गधीः ।
युक्तैव तद्विदामाद्यं सर्वशक्ति हि तत्पदम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जो क्षणिकविज्ञानवादी
हैं, उनका जो यह कहना है कि प्रतिक्षण में परिणाम को प्राप्त करनेवाले पदार्थ में निरन्तर
उलट-पुलट देखने में आता है, अतः सब पदार्थ क्षणिक ही हैं, यह भी उनका कहना सत्य है,
क्योंकि उनकी बुद्धि (क्षणभंगबुद्धि) के अनुसार वैसी स्थिति हो सकती है