Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
चिदेव शैलवद्भाति यथा स्वप्ने निरामया ।
तथा ब्रह्म निराकारं सर्गवद्भाति नेतरत् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वप्न में एकमात्र निर्विकार आत्मचिति ही पर्वत के
सदृश भासती है, वैसे ही निराकार विकाररहित ब्रह्म ही सृष्टि-सा भासता है, दूसरा नहीं, यह
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