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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 41

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

न तदस्ति न यत्सत्यं न तदस्ति न यन्मृषा । यद्यथा येन निर्णीतं तत्तथा तं प्रति स्थितम् ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

इन सब बातों से निचोड़ यह निकला कि जयत्‌ के अनेक रुपों में सत्यता या असत्यता केवल अपने-अपने मन्तव्यों के अनुसार स्थित है, वास्तव में नहीं; यह कहते हैं / ऐसी कोई चीज नहीं है, जो सत्य न हो या ऐसी कोई चीज नहीं है, जो झूठी न हो, क्योकि अपनी-अपनी मति के अनुसार जिसने जैसा निश्चित किया, उसके सामने वैसी ही वस्तु उपस्थित हो जाती है, परन्तु यह वस्तुस्थिति नहीं है