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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 39

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

अपरिज्ञातदेहात्तु धत्ते मोहाभिधां स्वयम् । परिज्ञातस्वरूपात्तु धत्ते मोक्षाभिधां स्वयम् ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

तब बन्ध और मोक्ष में विशेष किस बात को लेकर है इसे बतलाते हैं / चिति अपने असली स्वरूप को न जानने के कारण स्वयं मोह नाम धारण करती है यानी संसारग्रस्त हो जाती है और जब अपना असली रूप जान जाती है, तब मोक्षनाम को स्वयं धारण कर लेती है यानी मोक्षरूप बन जाती है