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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 36

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

तस्मान्न म्रियते किंचिन्न च जीवति किंचन । जीवामीति मृतोऽस्मीति चिच्चेतति न नश्यति ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

यों जब मरण ही अप्रग्तिद्ध है, तब उससे भिन्‍न जीवन की भी कल्पना व्यर्थ है वह आशय रखकर कहते हैं / इससे न कुछ मरता है और न कुछ जीता ही है । मैं जीता हूँ या मैं मरा हूँ, इस प्रकार चिति केवल भ्रान्ति का अनुभव करती है, वास्तव में वह मरती नहीं है