Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
न च्छिद्ये न च दह्येऽहं चिन्मात्रं वज्रवच्चिति ।
न देही निश्चयो यस्य तं प्रत्यन्तकरस्तृणम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं न तो
छेदा जाता हूँ, न मैं जलाया जाता हूँ, मैं वज के सदृश दृढ़ चेतन मात्र स्वरूप हूँ, न मैं शरीरी हूँ ।
इस प्रकार का निश्चय जिस महामति को है, उस महामति के प्रति यमराज भी तृण के सदृश तुच्छ
है