Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
एवमेवावभासन्ते सर्व एव स्वयंभुवः ।
सर्गाश्च न तु जायन्ते प्रयाता इव चोदिताः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी तरह ब्रह्मा के शरीर तथा तत्कृत सर्ग जो
जगत् तथा अन्य लोगों को उदित हुए-जैसे अवभासित हो रहे हैं वे सबके-सब पर (ब्रह्म) की दृष्टि
से ही आधिभौतिक हैं । वस्तुतः वे नहीं हैं, वे तो कभी उत्पन्न ही नहीं होते