Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
यैरहं सलिलाद्दृष्टः प्रोत्थितस्तैर्मुनीश्वरैः ।
उक्तो वारिवसिष्ठोऽहमिति मे जन्मसंततिः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जिन मुनीश्वरों ने मुझे जल से आविर्भूत हुआ देखा उन्होंने
मुझे “वारिवसिष्ठ" नाम से पुकारा । हे श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रकार विभिन्न कल्पनाओं द्वारा मेरी
यह जन्मपरम्परा है अर्थात् जिन जिन महानुभावों ने जहाँ से मुझे जैसे निकलते देखा उन्होंने
वैसे ही मेरे नाम और जन्म की कल्पना कर दी