Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 85
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 85 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 85
संस्कृत श्लोक
एषा पिशाचाजनितस्य जातिः प्रोक्ता मया ते समयानपेता ।
पिशाचतुल्यः सुरलोकपाललोकेषु जातोऽहमिति प्रसङ्गात् ॥ ८५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, पिशाचयोनि में उत्पन्न जीव की जाति का मैंने आपसे वर्णन
कर दिया, जैसा कि आपने मुझसे पूछा था । पूछी गई बातों का अवश्य उत्तर देना ही चाहिए, यह
व्याख्याताओं का सम्प्रदाय है, इससे शून्य यह पिशाच जाति न थी । अर्थात् सुरलोकपालं के
लोकों में मै पिशाचतुल्य हो गया, यह जो मैंने आपसे कहा था, उसी के प्रसंग में आपने मुझसे
पिशाचजाति के विषय में पूछ दिया (5)