Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 79
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 79 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 79
संस्कृत श्लोक
स्थिता यथैता जगति पिशाचाद्याः कुजातयः ।
प्रायस्तथैताः कुम्भाण्डयक्षप्रेतादयः स्थिताः ॥ ७९ ॥
हिन्दी अर्थ
पिशाचजातियों की तरह कृम्भाण्डादि जातियें की भी प्राय: सृक्ष्मदेहता होती है तथा इनमें भी
वेष्टा आदि ठीक वैसे ही पाये जाते हैं; यह कहते हैं /
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस संसार में जैसे पिशाच आदि दुष्ट जातियाँ स्थित हैं प्रायः वैसे ही ये
कुम्भाण्ड, यक्ष तथा प्रेत आदि भी स्थित हैं