Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 60
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
यथैवैतन्मनः सत्यं तदंशाः सत्यमेव ते ।
तथैव तत्कृताश्चन्द्ररुद्रार्केन्दुमरीचयः ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
तब उनके द्वारा निर्मित हुए चन्द्र, सूर्या तारे आदि सर्वविध अर्थक्रिया में हेतु कैसे हैं ? इस
आशंका पर कहते हैं ।
जैसे यह मनरूप ब्रह्मदेव सत्य हैं वैसे ही उनके द्वारा निर्मित हुए उनकी वृत्तिरूप वे चन्द्र, रुद्र,
सूर्य तथा चन्द्रकिरण आदि भी सत्य ही हैं यानी प्रवृत्ति आदि अर्थक्रिया के सम्पादन में समर्थ
हैं