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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 49

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

यद्वेत्ति कल्पितं तत्सत्पश्यत्यनुभवत्यपि । यो यावन्मात्रकस्तत्स कस्मात्किल न पश्यति ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

एकमात्र यह कारण है कि वह ब्रह्मा अपने जिस जिस संकल्प को जानता है तत्‌-तत्‌ पदार्थो के आकार से उसका अवलोकन करता है । ओर स्वयं उसका अनुभव भी करता है । जो जिस परिणाम का जीव है वह सब चित्रूप सत्‌ ही है । इसलिए ज्ञानशक्ति से सम्पन्न वह क्यों न अवलोकन करे ?