Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
एवं मनःस्थितो ब्रह्मा सदेहोऽप्यमलं नभः ।
तत्स्वप्नपुरुषाकारः सन्नेवासद्वपुः सदा ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस
प्रकार मन ही ब्रह्मा बनकर स्थित है । वह ब्रह्मा सदेह होने पर भी निर्मल आकाशरूप ही है। स्वप्न
के पुरुष के आकार के सदृश उपस्थित रहने पर भी उसका वह शरीर असत् ही है