Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
एतदास्पदमेतेषामित्याकाराः प्रकीर्तिताः ।
पिशाचा एवमाचारा जन्मैषां श्रूयतामिदम् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इनके यही सब रहने
के स्थान हैं, इसी तरह के आकार के तथा ऐसे ही आचार के वे पिशाच होते हैं, यह सब मैंने आपसे
कह दिया अर्थात् आपने जो प्रश्न किया था कि वे किस आकार के होते हैं उनका आचार क्या है
तथा वे कहाँ रहते हैं, इसका उत्तर मैंने आपको दे दिया है अब इनका आप यह जन्म सुनिये