Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
पिशाचाः सन्ति लोकेऽस्मिन्यादृशास्तादृशान्श्रृणु ।
न सभ्योऽसौ न यो वक्ति प्रसङ्गापतितं वचः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, इस लोक
में पिशाच जिस तरह के हैं, उनका मैं आपसे वर्णन करता हूँ, आप सुनिये । जो मनुष्य प्रसंगप्राप्त
वचन नहीं बोलता वह सभ्य नहीं है