Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
न ग्रहीता न च ग्राह्यस्त्वादृशार्थावबोधिनाम् ।
न चैव देशकालानां क्वचिदावृत्तिकारकः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय न तो मैं आपके सदृश स्थूल
पदार्थो के अवबोध करनेवालों की तरह ग्रहीता (ग्रहणकर्ता) था और न ग्राह्य ही था । हे श्रीरामचन्द्रजी,
उस समय मैं प्रेषण, प्रतीक्षण आदि के द्वारा दूसरों के देशों और कालों का परिवर्तन करनेवाला भी
नहीं था