Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 97
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, verse 97 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 97
संस्कृत श्लोक
तदा त्वत्र मया ज्ञातं कश्चित्सिद्धोऽयमात्मना ।
देहं त्यक्त्वेह निर्वाणं गत इत्यनुमानतः ॥ ९७ ॥
हिन्दी अर्थ
आपने उस्र समय क्या स्रमझा था, इस पर कहते हैं /
हे मुने, उस समय तो मैंने अनुमान से यह समझा था कि कोई सिद्ध यहाँ रहता होगा और
वह अपने आप अपना शरीर छोड़कर यहाँ मुक्ति को प्राप्त हो गया है