Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 95
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, verse 95 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 95
संस्कृत श्लोक
चिरमेकान्तविश्रान्त्यै तेनैतन्नभसः पदम् ।
त्वमिवागतवानत्र दृष्टवानस्मि तां कुटीम् ॥ ९५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, इसी
कारण आपकी तरह मैं भी दीर्घकाल तक विश्रान्ति करने के निमित्त इस आकाशस्थान में, जो
कि आपकी कल्पना की कुटिया का भाजन रहा, आया और मैंने उस कुटिया को देखा