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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 80

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, verse 80 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 80

संस्कृत श्लोक

आपातरमणीयेषु रमन्ते विषयेषु ये । अत्यन्तविरसान्तेषु पतन्ति निरयेषु ते ॥ ८० ॥

हिन्दी अर्थ

विषय तो आपातरमणीय हैं यानी इन्द्रियसंगकाल में ही रम्य भासते हैं, ये परिणाम में अत्यन्त नीरस हैं, इसलिए ऐसे विषयों में जो पुरुष रमण करते हैं, वे नरको मे ही गिरते हैं, क्योंकि विषयों के व्यसनियों को पद-पदपर अधर्म ही होता है