Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 54
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
सुखदुःखानुभवनाद्भूयोभूयो विवर्तनात् ।
अनित्यत्वाच्च भावानां स्थिता निष्कौतुका वयम् ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
सुख-
दुःख के बार-बार के अनुभव से, बार बार अनेक तरह के परिवर्तनां से तथा पदार्थो की नश्वरता
से अब हम भोगों से ऊब उठे हँ यानी उनमें अब किसी तरह की उत्कण्ठा नहीं