Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 52
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, verse 52 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
इदमद्य तथेदं च तथेदमिदमस्य मे ।
एवं कलनया लोको गतं प्राप्तं न वेत्त्यहो ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
आज यह हुआ, कल यह होगा, यह तो मेरा है और वह इसका
है, इस प्रकार रात दिन संकल्प-विकल्प करता हुआ प्राणी यह नहीं जान पाता कि मेरी कितनी
आयु चली गई और अब मेरी मृत्यु आ गई