Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
सर्वस्याः सरितो वारि प्रयात्यायाति चाकरात् ।
देहनद्याः पयस्त्वायुर्यात्येवायाति नो पुनः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
आयु में धनादि से विलक्षणता बतलाते हैं /
संसार में जितनी नदियाँ हैं, उनका जल तो पर्वत, मेघ आदि स्थान से आकर आता ओर
जाता रहता है, परन्तु देहरूपी नदी का आयुरूपी जल तो चला ही जाता है, फिर पुनः लौटकर
आता ही नहीं