Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
इत्युक्त्वा चिन्तयित्वाशु स यथा वृत्तमक्षतम् ।
स्मृतवान्सायमह्नीव समाचरितमात्मनः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, ऐसा कह कर उन्होने सोचकर
समस्त जन्मान्तरं के वृत्तान्तो के साथ अपना पूर्व वृत्तान्त जैसे पुरुष पूर्वान्ह मे आचरित वृत्तान्त
का सायं काल में स्मरण करता है वैसे ही तुरन्त स्मरण किया