Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
मदागमनमेतेन ततोऽचिन्तयता चिरम् ।
तं स्वदेहं शवीभूतमपास्येह कृता स्थितिः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद दीर्घं काल तक मेरी उपेक्षा के कारण शवरूप यहाँ स्थित मेरी देहको देखा,
देखने के बाद यह नहीं जाना कि मैं यहाँ फिर आऊँगा इससे मेरे शरीर को इन्होंने अन्यत्र फेंककर
इस कुटिया में अपना आसन जमाया है