Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 63
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
प्रत्येकं विश्वरूपात्मा सर्वकर्ता निरामयः ।
प्रबुद्धः शुद्धबोधात्मा सर्वं ब्रह्मात्मकं यतः ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, इसलिए
अध्यारोपदृष्टि से प्रत्येक में अपनी सत्ता का समर्पण करने के कारण मैं विश्वरूपात्मा ओर सबका
कर्ता हूँ तथा अपवाददृष्टि से प्रबुद्ध होकर मैं शुद्ध बोधस्वरूप ओर कर्तृत्वादि विकारों से रहित हूँ,
क्योकि सब-कुछ तो ब्रह्मात्मक ही ठहरा