Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 57
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, verse 57 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
परमाणु प्रति व्योम परमाणु प्रति स्थितम् ।
सर्गवृन्दं यथा स्वप्ने स्वप्नान्तरयुतं पुरम् ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, और भी सुनिये, उस अवस्था में प्रत्येक परमाणु के भीतर असीम आकाश स्थित था और उस
आकाश में भी उड़ रहे अनेक परमाणु विद्यमान थे, उन परमाणुओं के भीतर भी मैंने उस तरह के
असंख्य संसार देखे, जैसे कि स्वप्न के अन्दर अन्य स्वप्न के नगर दिखते हैं