Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 52
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, verse 52 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
किंचित्त्वे सदकिंचित्त्वं साकृतित्वं निराकृति ।
अनुभूतं सजाड्यं च चेतनत्वमलं मया ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय मैंने परिच्छननता-अपरिच्छिन्नता आदि सब विरुद्ध धर्मों का एक साथ अपनी
आत्मा में अनुभव किया, यह कहते हैं ।
उस दशा में किंचित्ता-अकिंचित्ता, साकारता, निराकारता, जड़ता-चेतनता आदि समस्त
परस्पर अतिविरुद्ध धर्मों का मैंने अपनी आत्मा में एक साथ खूब अनुभव किया