Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verses 32–33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, verses 32–33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 32,33
संस्कृत श्लोक
सचन्द्रार्कानिलाग्नीन्द्रपद्मवैश्रवणेश्वराः ।
सब्रह्महरिगन्धर्वा विद्याधरमहोरगाः ॥ ३२ ॥
ससागरगिरिद्वीपदिगन्तरमहार्णवाः ।
सलोकान्तरलोकेशक्रियाकालकलाक्रमाः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रत्येक परमाणु में किन किन पदार्थो के साथ चछरष्टिर्यो विमान - सी हैं; इसे कहते हैं /
उन सृष्टियों में चन्द्र, सूर्य, वायु, अग्नि, इन्द्र, वरुण, कुबेर एवं महेश्वर, ब्रह्मा, हरि ओर
गन्धर्व थे, विद्याधर तथा शेषराज थे । सागर, पर्वत, द्वीप, दिशाएँ एवं महान् समुद्र थे, अन्यान्यलोक,
लोकपाल, क्रिया, काल एवं कल्प के क्रम थे