Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

सीकरोत्करनीहारहेलाहरणतत्परः । सुरतश्रान्तसर्वाङ्गसमाह्लादनतर्षुलः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं जलकणों की राशि को इधर उधर बिखेरने तथा नीहारसमूह को लीला से (क्रीडा से) दूर दूर तक हरण करने में निरत रहता था ओर सुरतक्रीडा से क्लान्त युगलो के समस्त अंगो में आह्वाद पहुँचाने में रात-दिन सतृष्ण रहता था