Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
शरीरनगरे नाडीमार्गैर्गतिनिरर्गलः ।
रसभाण्डे परावर्तादायुर्मणिमहावणिक् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
शरीररूपी महानगर में
नाड़ी के मार्गों से किसी तरह की विघ्नबाधा (रोकटोक) के बिना अप्रतिहत गमन करता था तथा
अन्नरसमय देहपात्र में प्राणादि के रूपों से आवागमन कर आयुरूपी मणि के रक्षण में मैं महावणिक्
बन गया था