Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
धूमाम्बुवाहरजसां महावर्तकृदम्भसाम् ।
द्युनदीवाहवार्योघनभोनीलोत्पलालिकः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
मैंने वायुरूप होकर धूम्र, मेघ, रज ओर जलो का एक आवर्त-सा खड़ा कर दिया
था तथा आकाशगंगा के प्रवाहरूप मकरन्द के जल-समूह से युक्त आकाशरूप नील कमल का मैं
भ्रमर था