Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
पुष्पभारानताः स्पर्शैर्वसन्तवनितालताः ।
चिरं चपलयँल्लोलदलहस्तालिलोचनाः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
ऋतुराज
वसन्त की वनिता जैसी लताओं को में नर्मस्पर्शो से दीर्घकाल के लिए चपल बनाता था । वे
लतावनिताएँ फूलों के भारं से नत रहती थीं, उनके चंचल दल हाथ से प्रतीत होते थे और भ्रमर
नेत्र से लगते थे